सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसखारी में दिखी बड़ी लापरवाही बसखारी थाना क्षेत्र के नारायणपुर प्रीतमपुर निवासी दलित राम सुन्दर अपनी पत्नी शर्मिला(20) को अस्पताल पर ले कर इलाज़ कराने पहुचा था जहा पर्ची काउंटर पर बैठे दो लोगों ने यहाँ से यह कहते हुए कि पर्ची देने से मना कर दिया कि अस्पताल बंद हो गया है यहां पर आज इलाज नहीं हो सकता है। जिससे अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर रामसुंदर अपने घर की तरफ जाने लगा कि दोपहर के लगभग 12 .30 बजे बसखारी टांडा रोड पर महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गया एकांत की तलाश में गर्भवती महिला सामुदायिक शौचालय में चली गई जहां पर महिला को बच्चा पैदा हो गया और बच्चा शौचालय की सीट में जाकर अटक गया जिससे महिला की आवाज सुन वहां के स्थानीय निवासी अंकुर गौड़, अंकित गौड़ ने हल्ला मचाया जिस पर वहा से जा रहे बसखारी के समाजसेवी जावेद अहमद ने पहुंच कर नवजात शिशु को निकालने का प्रयास किया। सफलता न देख दौड़कर पास से दाई नीलम गुप्ता को ले आये और नीलम गुप्ता ने बड़ी मेहनत और सूझबूझ से लैट्रिन की सीट में फंसी नवजात बच्ची को सकुशल निकाला और पास के एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया जहां पर उपचार के बाद जच्चा बच्चा दोनों ठीक हैं वहीं इस प्रकार से मानवता तार तार होने की घटना के बारे में जब सीएचसी प्रभारी डॉक्टर मारकंडेय प्रसाद से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस प्रकार से कोई घटना हमारे यहां नहीं घटित हुई है और न ही किसी को यहां से मनगया है। जबकि भुक्तभोगी ने बताया कि सीएससी पर बसखारी के पर्ची काउंटर पर पहुंचने पर वहां पर मौजूद 2 लोगों ने अस्पताल बंद होने की बात कह कर डांट कर मना कर दिया। मामला डिप्टी सीएमओ के संज्ञान में जब स्थानी पत्रकारों द्वारा डाला गया तो उन्होंने विभाग का बचाव करते हुए कहा कि बच्ची सकुशल है यह बहुत बड़ी बात है यदि बच्ची के पिता द्वारा प्रार्थना पत्र दी जाती है तो जांच कराया जाएगा। वही प्रसूता शर्मिला ने सीएचसी बसखारी द्वारा की गई अमानवीय कृत को लेकर काफी आहत है।



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